तनाव के तमाम मुद्दे हैं तो भारत-चीन रिश्ते की मजबूत बुनियाद भी है- Pm Narendra Modi Xi Jinping

तमाम विवाद और तीखी नोंक-झोंक के बीच आज भारत और चीन के रिश्तों की नई इबारत लिखी जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के दौरे पर हैं, जहां वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ऐतिहासिक वार्ता करेंगे. डोकलाम जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच टकराव विश्वव्यापी चर्चा का विषय बना, लेकिन आर्थिक लिहाज से देखा जाए तो भारत-चीन के बीच रिश्ते काफी मजबूत हैं. अगले 24 घंटे में दोनों नेता 6 बार मिलेंगे और पर्सनल केमिस्ट्री की बदौलत आपसी रिश्तों की नई इबारत लिखने की कोशिश करेंगे. भारत-चीन के बीच व्यापार काफी बड़े पैमाने पर किया जाता है. भारत हर साल चीन से करीब साढ़े तीन लाख करोड़ का सामान आयात करता है. जबकि चीन भारत से 1.06 लाख करोड़ का सामान आयात करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2008 में चीन भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर बन गया था. हालांकि, मौजूदा वक्त में भारत और चीन के बीच एक बड़ा व्यापार घाटा पनपा है, जो मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी है. इस घाटे का सीधा मतलब है कि हम चीन से जितना उत्पाद और सेवाएं खरीदते हैं, उससे कम उत्पाद और सेवाएं हम चीन के बाजार में बेचते हैं. बावजूद इसके दोनों देशों के बीच व्यापार में इजाफा हो रहा है. मोबाइल मार्केट पर कब्जा चाइनीज फोन भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुए हैं. यही वजह है कि भारतीय मोबाइल बाजार पर अकेले चीन की बड़ी हिस्सेदारी है. भारत की मोबाइल मार्केट के 56 फीसदी पर चीन का कब्जा है. इतना ही नहीं, दिल्ली मेट्रो में भी चीनी कंपनी काम कर रही हैं. साथ ही पावर सेक्टर में भी चीन का बड़ा दखल है. करीब 80 फीसदी प्रोडक्ट्स चीन से ही आयात किए जाते हैं. ये है व्यापार वित्त वर्ष 2017-18 अप्रैल से जनवरी के दौरान भारत ने चीन को 10.3 बिलियन डॉलर का निर्यात किया जबकि इस दौरान भारत ने चीन से लगभग 63.2 बिलियन डॉलर का आयात किया. हालांकि, भारत को इससे बड़ा आर्थिक घाटा उठाना पड़ा है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़े पैमाने पर हुआ है. कई राज्यों की विकास परियोजनाओं में चीन की भूमिका भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों की मजबूती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चीन जाने वाले हैं. बताया जा रहा है कि चीनी निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए योगी वहां जा रहे हैं. गुजरात, कर्नाटक समेत भारत के कई ऐसे राज्य हैं जहां से चीन का सीधा कारोबारी हित जुड़ा हुआ है. उत्तर प्रदेश को देश के विकास इंजन बनाने के लिए भी मोदी सरकार की नजर चीनी सहयोग पर है. पीएम मोदी का ये दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों को नया आयाम दे सकता है.
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