मोदी मैजिक फीका होता देख NDA के सहयोगी दल देने लगे नसीहतें-narendra-modi-nda

यूपी में कैराना लोकसभा उपचुनाव और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को करारा झटका लगा है. उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के फौरन बाद सहयोगी दलों के सुर बदल गए हैं. कल तक जो ‘मोदी मैजिक’ की महिमा गा रहे थे, उन्हें अब इसमें खोट दिखने लगा है. कर्नाटक के बाद अब उपचुनाव में भी बीजेपी का कम होता ‘जलाल’ सहयोगी दलों को खुलकर बोलने का मौका दे रहा है. बिहार में आरजेडी से दोस्ती तोड़ एनडीए में शामिल होने वाले जेडीयू नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कुछ समय से गाहे-बगाहे सरकार के फैसलों की आलोचना करते दिख रहे हैं. दो हफ्ते में चार बार नीतीश नाखुश पिछले दो हफ्तों में कम से कम चार बार नीतीश कुमार ने बीजेपी के रवैए पर नाखुशी जाहिर की है. 17 मई को नीतीश कुमार ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जो मोदी सरकार के सिटीजनशिप बिल के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. यह बिल बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से काफी संवदेनशील मसला है. इस बिल में कहा गया है कि पड़ोसी देशों के हिंदुओं को अगर धर्म के आधार पर परेशान किया जाता है तो उन्हें भारत में नागरिकता दी जाए. नीतीश कुमार ने आसू के प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया कि वह पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस बिल को रोकने की मांग करेंगे. इसका मतलब यह है कि मोदी सरकार यदि संसद में यह बिल लाती है तो जेडी (यू) इसका विरोध कर सकती है. नोटबंदी पर किए थे सवाल नोटबंदी के बाद 26 मई को नीतीश कुमार ने पहली बार इस पर सवाल उठाए. पटना में आयोजित एक बैंकिंग सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं नोटबंदी का प्रबल समर्थक था, लेकिन इससे कितने लोगों को फायदा हुआ? कुछ ताकतवर लोगों ने अपनी नकदी एक जगह से दूसरे जगह भेज दी, गरीब परेशान हुए.' विपक्षी दलों ने भी नोटबंदी के मामले में मोदी सरकार पर ऐसे ही आरोप लगाए थे. इसके एक दिन बाद ही नीतीश कुमार को नाराज करने का एक और वाकया हो गया. मोदी सरकार ने बिहार सरकार को बाढ़ राहत के लिए 1,750 करोड़ रुपये देने को कहे थे, लेकिन बिहार को वास्तव में सिर्फ 1,250 करोड़ रुपये ही मिले. नीतीश कुमार इस बाढ़ राहत पैकेज से खुश नहीं हैं. इसके अलावा नीतीश ने बिहार के लिए विशेष पैकेज की फिर से मांग तेज कर दी है. जोकीहाट हारने पर JDU ने BJP पर मढ़ा ठीकरा उपचुनाव में एनडीए की सहयोगी जेडीयू जोकीहाट विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से हार गई है. जेडीयू नेता केसी त्यागी ने खुले लफ्जों में इसका ठीकरा बीजेपी पर फोड़ दिया है. उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें इस हार की वजह है. उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम जल्द से जल्द घटाने चाहिए. जोकीहाट सीट के बारे में उन्होंने कहा कि ये राजद की जीत नहीं है, ये सीट पहले से ही तस्लीमुद्दीन के पास थी. अब उनके बेटे ने पार्टी बदल ली है, इसी वजह से जीत हुई है. त्यागी इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने ये भी कह दिया कि उपचुनाव के नतीजे एनडीए के लिए चिंता का विषय है. एनडीए में अभी सहयोगी अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में दो बड़े दल एक साथ आ गए हैं, इसलिए वहां के नतीजे खतरे की घंटी बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को दुरुस्त करने की जरूरत है. शिवसेना खुलकर आमने-सामने की लड़ रही लड़ाई एनडीए के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिवसेना बीजेपी से सीधे दो-दो हाथ की लड़ाई लड़ रही है. बाल ठाकरे के वक्त तक ये दोस्ती परवान पर थी, लेकिन कमान उद्धव ठाकरे के हाथ में आने के बाद से दोनों ही दलों में तल्खियां बढ़ती गईं. रिश्तों में कड़वाहट इस कदर आ चुकी है कि उद्धव यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को चप्पलों से मारने तक की सलाह दे चुके हैं. पीडीपी भी मोदी सरकार से नाखुश अब बात करते हैं पीडीपी की. पीडीपी यानि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की. दो विपरीत विचारधारा वाली ये पार्टियां राज्य में मिलकर सरकार चला रही हैं. महबूबा जब-तब राज्य में पत्थरबाजों के लिए रहम की बात करने दिल्ली आती हैं. रमजान के दौरान कश्मीर में सीजफायर की उन्होंने पैरवी की, तो गृहमंत्री ने इस बात को खारिज कर दिया. कश्मीर के लिए मोदी सरकार के प्रयासों से नाखुश महबूबा कई बार अपना विरोध जता चुकी हैं. वे अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान की गई कवायदों को हवाला देते हुए उन पर अमल की बात करती रही हैं.
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