महाराष्ट्र के किसानों ने किया प्रदर्शन का ऐलान, PAK से चीनी का आयात रोकने की मांग-maharashtra-further-plan-of-farmers-strike

देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच महाराष्ट्र के किसानों ने 5 जून को एक बार फिर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. आयातित चीनी, दूध और अरहर दाल का बहिष्कार करने की चेतावनी के साथ किसानों ने सरकार को आगाह किया है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे आंदोलन करेंगे. इस साल मार्च में महाराष्ट्र के 30,000 से ज्यादा किसान कर्जमाफी सहित विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने नासिक से चलकर मुंबई पहुंचे थे. उस दौरान राज्य की बीजेपी सरकार को झुकना पड़ा था और किसानों की मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया गया था. चक्का जाम की घोषणा इस बीच महाराष्ट्र के किसान संगठनों ने कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो राज्य के किसान एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे. किसानों ने कहा है कि वे सात जून को शहरों के लिए उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति रोक देंगे. किसानों ने 10 जून को समूचे महाराष्ट्र में चक्का जाम करने की भी घोषणा की है. वहीं किसानों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन शनिवार को महाराष्ट्र के नासिक जिले में विभिन्न बाजार समितियों तक सब्जियां पहुंचाने और जिले में दूध एकत्रित करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे कृषक संगठनों में से एक के वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी. अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू देसाले ने बताया, 'जिले की सभी दूध डेयरियां बंद हैं और दूध इकठ्ठा करने वाले केंद्र इससे प्रभावित हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शनिवार सुबह येओला तालुका के विसपुर में सड़कों पर दूध उड़ेल दिया. एपीएमसी में सब्जियां बहुत धीमी गति से पहुंचाई जा रही हैं.' नासिक कृषि उत्पादन बाजार समिति के एक अधिकारी ने बताया कि विरोध के चलते सब्जियां देरी से पहुंचाई जा रही हैं. महाराष्ट्र के किसानों की मांग - महाराष्ट्र के 89 लाख किसानों का कर्ज माफ किया जाए. सरकार ने 34,000 करोड़ रुपये माफ करने का वादा किया था जो कि अभी अधूरा है. - अभी दालों का आयात मोजाम्बिक से किया जा रहा है, किसान इसे रोकने की मांग कर रहे हैं. - किसानों का कहना है कि महाराष्ट्र में पर्याप्त चीनी का उत्पादन हो रहा है, पाकिस्तान से इसका आयात किया जा रहा है, जिसे रोका जाना चाहिए. - महाराष्ट्र में दूध का पर्याप्त उत्पादन होता है, लेकिन राज्य सरकार गुजरात या अन्य राज्यों से इसे आयात करती है. सरकार इसे बंद करे और राज्य के किसानों से दूध खरीदे. - राज्य के किसानों को प्रति लीटर 17 रुपये मिलते हैं, जबकि सरकार का प्रस्ताव 27 रुपये प्रति लीटर था. ग्राहकों को 42 रुपये प्रति लीटर दूध मिलता है, इसे तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए. बता दें कि स्वामिनाथन आयोग की अनुशंसाओं और कृषि ऋण माफी आदि की मांग को लेकर कई किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से 10 दिन के विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जो देश के 22 राज्यों में एक जून से चल रहा है.
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