भारतीय रुपये का इतिहास में सबसे निचला स्तर, पहली बार 73.77/$ तक फिसला

नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. गुरुवार को रुपये की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई. डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 73.60 के स्तर पर खुला. शुरुआती कारोबार में रुपये और टूट गया. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे गिरकर 73.77 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. बुधवार को भी रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. डॉलर के मुकाबले 43 पैसे कमजोर होकर 73.34 के स्तर पर बंद हुआ था. बुधवार को रुपये ने पहली बार 73 के स्तर को पार किया था. क्यों गिर रहा है रुपया दुनिया की प्रमुख करंसीज के बास्केट में डॉलर में लगातार मजबूती आ रही है. यह रुपये के कमजोर होने की सबसे बड़ी वजह है. आयातकों की ओर से डॉलर की सतत मांग और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपया पर दबाव रहा. विदेशी निवेशक लगातार पूंजी निकाल रहे हैं. 15 फीसदी टूट चुका है रुपया साल 2018 में रुपया करीब 15 फीसदी टूट चुका है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते ट्रेड वार और करेंट अकाउंट डेफिसिट के बढ़ने की आशंका से रुपये पर असर पड़ा है. वहीं, डॉलर में मजबूती, घरेलू स्तर पर निर्यात घटने और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारक भी रुपये की गिरावट की बड़ी वजह हैं. शेयर बाजार पर भी दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पूंजी बाजार से 38.32 करोड़ डॉलर निकालने से शेयर बाजार भी औंधे मुंह गिर गया है. गुरुवार को सेंसेक्स 633 टूटकर 35,341.68 के स्तर पर आ गया. वहीं, निफ्टी में भी 194.6 अंक की गिरावट के साथ गिरकर 10,663.65 के स्तर पर लुढ़क गया. रुपया और होगा कमजोर नोमुरा के मुताबिक, नोमुरा के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 75 का स्तर छू सकता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होगा. डॉलर की बढ़ती डिमांड, राजनीतिक अनिश्चितता और यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने के संकेत से रुपए में और कमजोरी आ सकती है.
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