धनतेरस पर महासंयोग, जानिए किस समय में क्या खरीदना होगा - Loktantra Ki Buniyad

"इस वर्ष धनत्रयोदशी का पर्व आकाश मण्डल के बारहवें नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में मनाया जाएगा। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी आदि ग्रह सूर्य हैं। लिहाजा इस वर्ष धनतेरस का पर्व नाम, मान, यश, उग्रता, आवेश, देशभक्ति और स्वास्थ्य लेकर आ रहा है। 25 तारीख को सुबह 9 बजकर 23 मिनट के बाद पूरे दिन वैधृति योग रहेगा।धनतेरस पर अष्‍टधातु से बने गणेश-लक्ष्‍मी घर लाने के ये फायदे जानते हैं आपउदया तिथि 26 अक्टूबर को है पर धन त्रयोदशी का मान 25 अक्टूबर को ही होगा। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में लक्ष्मी-कुबेर का पूजन, जहां आर्थिक स्थिति के लिए विलक्षण परिणाम प्रदायक होगा, वहीं ये पल आत्मिक उन्नति का भी साक्षी बनेगा। पंचांग की गणना के अनुसार इश वर्ष धन त्रयोदशी का आरंभ 25 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 38 मिनट पर होगा। त्रयोदशी 26 अक्टूबर की शाम 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगी।राहुकाल प्रातः 10.30 से लगभग 12 बजे तक रहेगा। धनतेरस पर वृष लग्न में कुबेर और लक्ष्मी का पूजन श्रेयस्कर होगा। भगवान धन्वंतरी को हिंदू धर्म में देव वैद्य का पद प्राप्त है। लिहाजा उत्तम स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरी पूजन अमृत चौघड़िया, लाभ चौघड़िया, धनु लग्न या कुंभ लग्न में करना चाहिए।सूर्यास्त के पश्चात अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर 4 बातियों का दीप दान यानि दीप का प्रज्जवलन करना चाहिए। रात्रि में आरोग्य प्राप्ति के लिए भगवान धनवंतरी तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके भगवती लक्ष्मी को नैवेद्य में धनिया, गुड़ व धान का लावा अर्पित करना चाहिए।धनतेरस और दिवाली पर राशि के अनुसार करेंगे खरीदारी तो चमक जाएगी किस्‍मतकब क्या ख़रीदें?व्यापारियों की मान्यता है कि लक्ष्मी सदैव हिसाब किताब यानी बही खाते में निवास करती हैं। धन त्रयोदशी पर बही खाता यानी पुस्तक खरीदने और उसके पूजन का विशेष महत्व है। बही खाता, चोपड़ा यानी खाता लिखने वाली पुस्तक का क्रय शुभ-चौघड़िया में ही करना चाहिए। धनतेरस पर रजत यानी चांदी खरीदना सौभाग्य कारक माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन खरीदे हुए रजत में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है।ग्रहयोग अगले कुछ वर्षों में चांदी में भारी उछाल का संकेत दे रहे हैं। चांदी के अभाव में ताम्र या अन्य धातुओं का क्रय किया जा सकता है। सोना चांदी और अन्य धातु वृष लग्न में खरीदना चाहिए। कार या बाइक शुभ चौघड़िया, कुंभ लग्न, चर-चौघड़िया या वृषभ-लग्न में क्रय किया जा सकता है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान शुभ-चौघड़िया, उद्वेग-चौघड़िया और कुंभ लग्न में घर लाना शुभ है। म्यूचूअल फंड और शेयर शुभ चौघड़िया, लाभ चौघड़िया और कुंभ लग्न में खरीदना चाहिए। इस दिन हथियार, विस्फोटक सामग्री या अनावश्यक वस्तुएं कदापि नहीं खरीदनी चाहिए।क्या है चौघड़िया?सूर्योदय से सूर्यास्त तथा सूर्यास्त से सूर्योदय के मध्य का काल 30-30 घटी यानी घड़ी में मापा गया है। 30 घटी को अष्ट भाग में बांटने पर दिन और रात्रि के 8-8 चौघड़िया प्राप्त होते हैं। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 4 घटी का होता है, इसलिए इसे चौ अर्थात चार + घड़िया, घटी, या बेला के नाम से जाना जाता है। इसे चतुर्श्तिका भी कहते हैं।धनतेरस पर शुभ संयोग, 5 रुपये के 8 सामान खरीदकर बन सकते हैं धनवानधनतेरस का चौघड़ियाचर चौघड़िया- 6.32 प्रातः से 7.55 प्रातः वाहन, चल संपत्ति के लिए शुभलाभ चौघड़िया- 7.55 प्रातः से 9.18 प्रातः सोना, चांदी, बर्तन, स्थायी संपत्तिअमृत चौघड़िया- 9.18 प्रातः से 10.42 प्रातः सोना, चांदी, बर्तन, स्थायी संपत्तिकाल चौघड़िया- 10.42 प्रातः से 12.05शुभ चौघड़िया- 12.05 दोपहर से 13.28 सोना, चांदी, बर्तन, स्थायी संपत्तिरोग चौघड़िया- 13.28 से 14.52उद्वेग चौघड़िया- 14.52 से 16.15 मोबाइल, बिजली के उपकरणचर चौघड़िया- 16.15 से 17.38 वाहन, चल संपत्ति के लिए शुभरोग चौघड़िया- 17.38 से 19.15काल चौघड़िया- 19.15 से 20.52लाभ चौघड़िया- 20.52 से 22.29 सोना, चांदी, बर्तन, स्थायी संपत्तिउद्वेग चौघड़िया- 22.29 से 24.05 मोबाइल, बिजली के उपकरणधनतेरस पर महासंयोग, इस लग्न में करें पूजा धनतेरस इस वर्ष शुक्रवार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धनतेरस को यूं तो अबूझ मुहूर्त माना जाता है फिर भी इस बार का धनतेरस बहुत ही शुभ माना जा रहा है। कुछ ज्योतिषी कह रहे हैं कि 100 साल बाद धनतेरस पर बेहद शुभ संयोग बना है। जबकि पंचांग उठाकर देखें तो पाएंगे कि धनतेरस पर महज 3 साल बाद ही वो शुभ संयोग बना है जो बेहद शुभ फलदायी है।दरअसल कहा जा रहा है कि 100 साल बाद धनतेरस शुक्रवार को शुक्र प्रदोष में मनाया जाएगा। जबकि 2016 में 28 अक्टूबर को धनतेरस मनाया गया था। उस दिन भी शुक्रवार और शुक्र प्रदोष में ही यह त्योहार मनाया गया था।लेकिन इस साल मनाया जाने वाला धनतेरस और भी शुभ संयोग लेकर आया है। इस साल धनतेरस पर ब्रह्म और ऐन्द्र योग का संयोग बना है। यह संयोग समृद्धि कारक है। इस योग के साथ इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग भी बना है जो धनतेरस के शुभ मुहूर्त के लिए सोने पर सुहागा है।शुक्रवार की स्वामिनी देवी लक्ष्मी हैं। ऐसे में धनतेरस के अवसर पर देवी लक्ष्मी और गणेश की चांदी की प्रतिमा, चांदी के बर्तन खरीदना बेहद शुभ फलदायी होगा। धनतेरस के दिन प्रदोष काल में यानी संध्या के कपूर जलाकर देवी लक्ष्मी की आरती पूजन करना समृद्धि और सुखदायक रहेगा। कपूर की आरती सभी कमरे में दिखाएं इससे नकारात्मक उर्जा घर से निकल जाएगी।
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