बुराड़ी की जनता के हितों के लिए चुनावी समर में प्रसिद्ध समाजसेवी दीपक गुप्ता

राजधानी दिल्ली में चुनावी सरगर्मियां शुरू होते ही राजनीतिक पार्टियों को चुनौती देने का दौर भी शुरू हो गया है इसी कड़ी में बुराड़ी विधानसभा में पिछले 25 सालों से समाजसेवा के कार्य में जुटे दीपक गुप्ता ने भी आने वाले विधानसभा चुनाव मे चुनावी रन में उतरने का मन बना लिया है साथ बुराड़ी विधानसभा के तमाम जनप्रतिनिधियों को खुली चुनौती दी कि वह जब चाहे जहां चाहे खुली बहस में आ सकते हैं। बहस तर्क विकास कार्य और मुद्दों को लेकर की जाएगी जिसमें यदि जनप्रतिनिधि के तर्क और विकास कार्यों से दीपाक गुप्ता व उनके समर्थक संतुष्ट हो जाते हैं तो वह अपने चुनाव लड़ने के फैसले पर विचार भी कर सकते हैं। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी विधानसभा में समस्याओं का अंबार है इसी समस्या को लेकर जनता सालों से परेशान है यहां नाली की साफ-सफाई से लेकर सड़क जाम तक जैसे कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कई बार सवाल उठाए गए लेकिन अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इन समस्याओं का समाधान नहीं किया। आवाज उठाने के उसी क्रम में दीपक गुप्ता भी शामिल थे। दरअसल दीपक गुप्ता पिछले 25 सालों से बुराड़ी विधानसभा में समाज सेवा के कार्य में जुटे हुए हैं और कई ऐसे कार्यक्रम आयोजित करा चुके हैं जिससे लोगों का सामाजिक उत्थान हुआ है आखिरकार जनप्रतिनिधियों की इसी लचर रवैया से परेशान होकर दीपक गुप्ता ने समाज सेवा करते हुए आने वाले विधानसभा चुनाव के चुनावी रण में उतरने का मन बना लिया। उनका कहना है कि वह एक पार्टी से बातचीत भी कर रहे हैं जहां उन्हें टिकट का आश्वासन मिला है यदि किसी पार्टी से टिकट मिला तो सही नहीं तो वह निर्दलीय ही चुनावी रण में उतरेंगे और उनके लड़ाई किसी भी जनप्रतिनिधि से नहीं बल्कि मुद्दों को लेकर है। बुराड़ी विधानसभा में कई ऐसे विकास कार्य हैं जिन्हें किया तो जा सकता था लेकिन अभी तक काम अधूरे पड़े हुए हैं। यहां प्रदूषण, सड़क जाम, नाले-नालियों की सफाई जैसे तमाम कई ऐसे मुद्दे हैं जिससे जनता त्रस्त हो चुकी है। बहरहाल अब इन्हीं मुद्दों को लेकर उनका समाधान निकालने के लिए दीपक गुप्ता चुनावी रण में उतरने का मन बना चुके हैं और उनका कहना है कि यदि जनता उनका साथ देती है तो वह सबसे पहले बुराड़ी की सबसे बड़ी समस्या सड़क जाम जैसे बड़े समस्या का निवारण करेंगे और उसके बाद कई मुद्दों पर काम कर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे... उनका कहना है कि मैं जनप्रतिनिधियों को खुली चुनौती देते हैं कि वह मुद्दों पर बहस कर सकते हैं और यदि मुद्दों पर बहस करते हुए जनप्रतिनिधि अपने तर्कों से उन्हें और उनके समर्थकों को संतुष्ट कर देते हैं तो वह चुनाव लड़ने या न लड़ने पर दोबारा से विचार करेंगे क्योंकि उनका मकसद नेता बनना नहीं बल्कि समाज में जिन मुद्दों पर भी काम कर रहे हैं उन्हें आगे बढ़ाना है। विधानसभा चुनाव में वैसे ही बुराड़ी विधानसभा कि सभी पार्टियों के लिए कांटे की टक्कर माना जा रहा है ऐसे में नए चेहरे उन लोगों के लिए और भी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं जिनकी टिकट विधानसभा चुनाव में लगभग तय मानी जा रही है। देखना यह होगा कि इस तरीके से नए चेहरों के चुनाव लड़ने से विधानसभा चुनाव के समीकरण में कितना असर होता है।
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