महाराष्ट्र में बदलेगा 'पावर' का ठिकाना, साउथ मुंबई में मातोश्री से छिनेगी 'एकछत्र ताकत'!

मुंबई: महाराष्ट्र में लंबा सियासी ड्रामा खत्म होने के बाद शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी एक साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं। गुरुवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के अगले सीएम के रूप में शपथ लेंगे। ऐसे में न सिर्फ प्रदेश की सत्ता बदलेगी, बल्कि एक जमाने में साउथ मुंबई में राजनीतिक ताकत का मजबूत केंद्र रहे ठाकरे निवास मातोश्री को भी अपनी 'महत्ता' साझा करनी होगी।शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे का आवास मातोश्री महाराष्ट्र की राजनीतिक पावर का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। ऐसा कहा जाए कि साउथ मुंबई में मातोश्री का पॉलिटिकल पावर के मामले में एकछत्र अधिकार था तो गलत नहीं होगा, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ठाकरे निवास को अब शरद पवार के नेपियन सी रोड स्थित आवास सिल्वर ओक से अपनी शक्तियां साझा करनी होंगी। प्रदेश की भावी सरकार में शरद पवार की एनसीपी अहम भूमिका में है। ऐसे में उद्धव ठाकरे सिल्वर ओक को हल्के में लेने की गलती नहीं करेंगे। सरकार चलाने के लिए अपने हर फैसलों में उन्हें साउथ मुंबई में पॉलिटिकल पावर के इस नए साझीदार को महत्व देना ही होगा। विधानसभा चुनाव के बाद बदली परिस्थितियां गौरतलब है कि शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के दौर में मातोश्री प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप रखता था। लंबे वक्त तक प्रदेश के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों में मातोश्री ने अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है, जब महाराष्ट्र के सीएम होने का सपना देख रहे उद्धव ठाकरे को अपनी राजनीतिक गोटियां सेट करने के लिए मातोश्री से बाहर निकलना पड़ा। यह बाला साहेब ठाकरे की परंपरा से प्रस्थान की घटना है।उद्धव ठाकरे को गठबंधन के नेताओं को मनाने के लिए कई बार इस परंपरा से समझौता करना पड़ा है। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें मालाबार हिल्स स्थित मुख्यमंत्री आवास वर्षा और मातोश्री, दोनों जगहों पर भी अपना समय विभाजित करना होगा। इसके अलावा ठाकरे अब हर किसी से अपने आवास पर मिलने की उम्मीद भी नहीं कर पाएंगे। बड़ी राजनीतिक हस्तियां रहीं मातोश्री की मेहमान बता दें कि बांद्रा में स्थित बाल ठाकरे के आवास पर बीजेपी के संस्थापक नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, प्रमोद महाजन और विलासराव देशमुख जैसी राजनीति हस्तियां मेहमान रह चुकी हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पवार के साथ मातोश्री जाने की घटना कौन भूल सकता है? साल 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में मुखर्जी शिवसेना से समर्थन मांगने के लिए ठाकरे से मिलने आए थे।
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