बरेलीः कांवड़ यात्रा के लिए खैलम में पुलिस ने बांटे 'रेड कार्ड', डरे मुसलमानों ने छोड़ा गांव

बरेली :उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में खैलम गांव है। गुरुवार को यहां से कांवड़ यात्रा निकली थी। बरेली जिले के मुस्लिम बाहुल्य इस गांव में पिछले साल शिवरात्रि के दिन सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। यहां इस बार सांप्रदायिक विभाजन साफतौर पर नजर आ रहा था। एक तरफ जहां शिव मंदिर की ओर जानेवाली लेन में कांवड़िए डीजे के तेज संगीत पर नाच रहे थे, वहीं इलाके में सन्नाटा पसरा था। बीते कुछ दिनों में यहां रहने वाले अधिकांश मुस्लिम परिवार अपना घर और गांव छोड़कर पलायन कर गए हैं। उन्हें डर था कि बवाल होने पर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। यह खौफ उस समय बढ़ गया जब अलीगंज के एसएचओ विशाल प्रताप सिंह की तरफ से यहां के 250 परिवारों को 'रेड कार्ड' दिए गए। ये कार्ड उनके लिए चेतावनी थे कि कांवड़ यात्रा के दौरान कोई शरारत नहीं होनी चाहिए। गुरुवार को दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे 150 कांवड़ियों का एक समूह उधर से गुजरा। एक ट्रैक्टर में डीजे लगा था और सभी कांवड़िए तेज धुनों पर नाच-गा रहे थे। वे गौरी शंकर मंदिर पहुंचे और वहां जलाभिषेक किया। इस दौरान यहां भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। इतना ही नहीं पुलिस फोर्स कांवड़ियों के साथ शिव मंदिर तक गई। कांवड़ यात्रा निकलने के दौरान सड़कों पर सिर्फ कुछ जानवर और बुजुर्गों के अलावा कोई और नजर नहीं आया। एसएचओ ने कहा कि रेड कार्ड हिंदुओं और मुसलमानों दोनों को दिए गए थे। यह सिर्फ इसलिए किया गया ताकि इलाके में शांति बनी रहे। इलाके में रहने वाले अयूब खान (70) ने बताया कि वह एक मुसलमान हैं। उनकी शिव मंदिर वाले रास्ते में एक छोटी सी दुकान है। वह दशकों से इस गांव में रह रहे हैं। सिर्फ पिछले साल उन्होंने इलाके में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा देखी। वास्तव में यहां के लोग खुद हिंसा को लेकर हैरान थे। अयूब ने कहा कि पिछले साल जो हिंसा हुई, वह कुछ बाहरी शरारती तत्वों ने यहां आकर की थी। उस घटना के बाद पुलिस ने 250 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन 250 लोगों में अधिकांश मुसलमान थे। लोगों में इस बार खौफ था कि अगर कुछ हुआ तो पुलिस उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई करेगी इसलिए उन्होंने गांव छोड़कर कहीं और चले जाना ही मुनासिब समझा।
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