एसपी-बीएसपी की काट निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चला 'एमबीसी कोटे' का दांव- primes-minister-owes-mbc-quota

बागपत: कैराना उपचुनाव के महत्व को देखते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बागपत रैली के दौरान पिछड़ा वर्ग के अंदर अति पिछड़ा वर्ग (मोस्ट बैकवर्ड क्लास या एमबीसी) के लोगों को विशेष कोटा की बात कही। मोदी का कहना था कि सरकार चाहती है कि पिछड़ी जातियों के बिखरे और अति पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण नीतियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके। ओबीसी कोटा के 27 पर्सेंट आरक्षण के अंदर ही अति पिछड़ा वर्ग के सब कोटा बनाने की संभावनाएं जांचने के लिए बनाए गए एक पैनल के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा, 'सरकारी चाहती है कि अभी तक मिली ओबीसी रिजर्वेशन सीमा के अंदर ही पिछड़ी जातियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। हमने इसके लिए एक कमिशन बनाया है, वह ओबीसी के अंदर सब-कैटिगरी बनाने का काम करेगी।' 2017 में मिली थी मदद, 2019 पर भी नजर बताते चलें कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मिली सफलता में ओबीसी कोटा में अति पिछड़ा वर्ग की बात ने बीजेपी को मदद की थी और वह 403 सीटों में से 312 पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी। पीएम मोदी द्वारा एमबीसी का मुद्दा उछालना सिर्फ कैराना नहीं बल्कि 2019 में भी ओबीसी वोट्स साधने की कोशिश हो सकती है। बीएसपी-एसपी के गठबंधन को देखते हुए बीजेपी के लिए यह जरूरी है कि वह जातियों को साधने के लिए कुछ खास कर सके। 2017 के विधानसभा चुनावों में देखा गया कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2014 जैसा ही प्रदर्शन किया लेकिन 2019 के लिए उसे और मेहनत करनी होगी क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि यूपी में विपक्ष एक होकर लड़ेगा। इसी को मद्देनजर एमबीसी कोटा पर बात करना बीजेपी की नई रणनीति है। इससे पहले 2000-2002 के दौरान राजनाथ सिंह की सरकार ने भी एमबीसी कोटा के बारे में बात की थी। सवर्णों की पार्टी वाला ठप्पा हटाने की कोशिश बीजेपी की कोशिश है कि उसके ऊपर सवर्णों की पार्टी का जो ठप्पा लगता है, वह भी हट सके और वह एसपी-बीएसपी से ओबीसी वोटर्स को दूर करके 2019 में फिर से सत्ता पा सके। गौरतलब है कि ओबीसी के अंतर्गत एमबीसी वोटर्स की तादाद बहुत बड़ी है लेकिन उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व बेहद कम है। अशिक्षा, गरीबी और सामाजिक रूप से पिछड़ापन इस बात का कारण है कि वे राजनीति में भी उतने प्रभावी नहीं हैं।
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