उपचुनाव का झटका: 2019 तक सहयोगियों को साथ रखना एनडीए के लिए होगी बड़ी चुनौती-Keeping-its-flock-united-will-be-ndas-major

नई दिल्ली :यूपी और अन्य प्रदेशों के उपचुनावों में लगे झटके ने 2019 के लिए बीजेपी की संभावनाओं को कमजोर बनाया है। ऐसे में अब जहां बीजेपी को न केवल नए चुनावी सहयोगियों की जरूरत है बल्कि शिवसेना, जेडीयू और अकाली जैसे एनडीए के मौजूदा सहयोगियों को बचाए रखने की भी चुनौती है। उपचुनावों में बीजेपी के इन तीनों प्रमुख सहयोगियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। ऐसे में गठबंधन में उनकी सौदेबाजी की क्षमता घटी है लेकिन बीजेपी के सामने चुनौती है कि सहयोगियों के बीच पैदा हो रहे तनावों को कैसे कम किया जाए। इसमें सबसे बड़ी चुनौती शिवसेना है। शिवसेना महाराष्ट्र में सीनियर पार्टनर की अपनी भूमिका से समझौता करने के लिए कत्तई तैयार नहीं है और पीएम मोदी समेत बीजेपी के नेताओं पर लगातार हमलावर है। शिवसेना 2019 लोकसभा चुनावों के कैंपेन शुरू होने तक ऐसे ही चुनौती बनी रहने वाली है। तमाम क्षेत्रीय दल अपने विरोधाभासों को भूलकर मोदी सरकार को सत्ता में वापसी से रोकने के लिए एकजुट हो रही हैं। हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस ग्रैंड अलायंस को अक्सर कमतर आंकते रहे हैं। अभी बिहार में बीजेपी को अपनी सहयोगी जेडीयू के बीच विरोधाभास फिर खड़े हो रहे हैं। हाल ही में नीतीश कुमार ने नोटबंदी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंकिंग सिस्टम से सहयोग नहीं मिलने की वजह से इसका कोई फायदा नहीं हुआ। पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में जब से विधानसभा चुनाव जीता है अकाली भी बीजेपी पर अपने सहयोगियों को एक साथ बनाए रखने को लेकर हमलावर रहने लगी है। खासकर जबसे टीडीपी नेता चंद्रबाबू ने एनडीए का साथ छोड़ा है, अकाली और मुखर हुए हैं। बीजेपी को फिलहाल यूपी में बड़ी चुनौती मिल रही है, जहां पार्टी 3 लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव हार चुकी है। कैराना ध्रुवीकरण की राजनीति का केंद्र बिंदु था लेकिन यहां भी बीजेपी कैंडिडेट मृगांका सिंह को आरएलडी कैंडिडेट तबस्सुम हसन ने विपक्षी एकजुटता की मदद से हरा दिया। बीजेपी ने 2014 में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यूपी लोकसभा में विपक्ष को साफ करते हुए 80 में से 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पर एसपी-बीएसपी के साथ आने से उपजी चिंताओं के बीच बीजेपी खुद को इस बात का ढांढस दे सकती है कि दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग के मुद्दे साफ नहीं हैं। यूपी में बीजेपी के सहयोगी दलों में से एक भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर लगातार योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ हमलावर हैं जबकि योगी सरकार में वह खुद कैबिनेट मंत्री हैं। जेडीयू ने बिहार के लिए एकबार फिर विशेष दर्जे की मांग उठाते हुए अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। चंद्रबाबू नायडू भी आंध्र के लिए इसी मांग को लेकर एनडीए का साथ छोड़ चुके हैं। बीजेपी को इस मांग के बारे में गंभीरता से सोचना पड़ सकता है क्योंकि एलजेपी के रामविलास पासवान और आरएलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा जैसे उसके अन्य सहयोगी भी नीतीश की इस मांग के विरोध में नहीं जा सकते।
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