फ्लैट बुक कराने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, नीति आयोग ने तैयार की यह योजना- good-news-for-home-buyers

अगर आपने भी दिल्ली-एनसीआर या अन्य किसी शहर में फ्लैट बुक कराया है और कई साल बीतने के बाद भी आपको पजेशन (कब्जा) नहीं मिला तो यह खबर आपको राहत दे सकती है. दरअसल रियल एस्टेट सेक्टर में फंसे हुए प्रोजक्ट पर फिर से काम शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी आई है. ऐसा होने पर घर खरीदारों को कब्जा मिलने में आसानी होगी. सूत्रों के अनुसार नीति आयोग ने फंसे हुए रिहायशी प्रोजेक्ट की लिस्ट मंगाई है. आयोग की तरफ से ऐसे प्रोजेक्ट की लिस्ट मंगाई गई है जिनमें फिर से आसानी से निर्माण का काम शुरू किया जा सके. नीति आयोग और अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री का प्लान आयोग ने लिस्ट में ऐसे प्रोजेक्ट का नाम शामिल करने के लिए कहा है जिन पर कोई भी बैंक आसानी से पैसे लगाने के लिए तैयार हो जाएं. इस योजना को नीति आयोग और अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री मिलकर तैयार कर रहे हैं. इसमें दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के दूसरे शहरों के फंसे हुए प्रोजेक्ट की लिस्ट भी मांगी गई है. आपको बता दें कि नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव के अलावा देश के कई शहरों में तमाम रिहायशी प्रोजेक्ट का निर्माण रुका हुआ है और बायर्स होम लोन की किश्त दे रहे हैं. इसके बावजूद भी खरीदारों का फ्लैट का पजेशन नहीं मिला है. लिस्ट में चार डेवलपर के नाम सूत्रों के अनुसार नीति आयोग को डेवलपर्स ग्रुप की तरफ से जो प्रोजेक्ट भेजे गए हैं उनमें सिक्का डेवलपर, सीएचडी डेवलपर्स, एसएंडएस ग्रुप और एके होम्स आदि शामिल हैं. जानकारी के अनुसार नीति आयोग को भेजी गई सूची में कुल 11 प्रोजेक्ट के नाम भेजे एक हैं. इनमें अकेले 4 प्रोजेक्ट सिक्का ग्रुप के हैं. माना जा रहा है आने वाले दिनों में डेवलपर्स बॉडी कुछ और प्रोजेक्ट की लिस्ट नीति आयोग को भेजेगी.ज्यादातर दिल्ली-एनसीआर के प्रोजेक्ट सूत्रों ने बताया कि अभी जिन प्रोजेक्ट को लिस्ट में शामिल किया गया है उनमें ज्यादातर दिल्ली-एनसीआर के हैं. इन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बैंको के साथ फंडिंग के लिए बातचीत की जाएगी. इसके बाद यह तय किया जाएगा कि प्रोजेक्ट को कैसे और कितने समय में पूरा किया जाए. सूत्रों का कहना है कि इस योजना पर भी काम चल रहा है कि फंडिंग के बाद अगर मौजूदा निजी डेवलपर ही इसे जल्द पूरा करने का भरोसा दे तो आगे बढ़ा जाए. प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग करेगी अथॉरिटी इन सभी प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग अथॉरिटी करेगी और रिकवरी की योजना भी तैयार करेगी. आयोग की योजना यह है कि होम बायर्स पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न आए और उन्हें अतिरिक्त पैसे देने के लिए भी न कहा जाए. आपको बता दें आयोग को दी जाने वाली सूची में ऐसे प्रोजेक्ट को शामिल नहीं किया जाएगा, जिनके मामले पहले से अदालत में विचाराधीन है. गौरतलब है कि आम्रपाली बिल्डर और जेपी बिल्डर के मामले में पहले से ही अदालत में सुनवाई चल रही है.
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