मायावती बोलीं- नाकामियां छिपा रही सरकार- Loktantra Ki Buniyad

सोनभद्र हत्याकांड पर सियासी घमासान जारी है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए किसी को सोनभद्र नहीं जाने दे रही है. उसे डर है कि उसकी विफलताओं के बारे में सभी को पता चल जाएगा. बता दें कि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने शुक्रवार कांग्रेस महाचसिव प्रियंका गांधी को सोनभद्र जाने से रोक दिया था. वो सोनभद्र हत्याकांड क पीड़ित परिवारों से मिलने जा रही थीं. उन्हें हिरासत में लेकर मिर्जापुर में एक गेस्ट हाउस में रखा गया है. प्रियंका को रोके जाने के बाद सियासत गर्म हो गई.मायावती ने ट्वीट कर कहा, 'यूपी सरकार जान-माल की सुरक्षा व जनहित के मामलें में अपनी विफलता को छिपाने के लिए धारा 144 का सहारा लेकर किसी को सोनभद्र जाने नहीं दे रही है. फिर भी उचित समय पर वहां जाकर पीड़ितों की यथासंभव मदद कराने का बीएसपी विधानमण्डल दल को निर्देश. सरकारी लापरवाही इस नरसंहार का मुख्य कारण.' उन्होंने कहा, 'यूपी के सोनभद्र में आदिवासी समाज का उत्पीड़न व शोषण, उनकी जमीन से बेदखली व अब नरसंहार स्टेट बीजेपी सरकार की कानून-व्यवस्था के मामले में फेल होने का पक्का प्रमाण. यूपी ही नहीं देश की जनता भी इन सबसे अति-चिन्तित जबकि बीएसपी की सरकार में एसटी तबके के हितों का भी खास ख्याल रखा गया.' शुक्रवार को भी मायावती ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से सोनभद्र मामले में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की बात कही थी. उन्होंने कहा, 'जैसा कि कई दिन के बाद आज सोनभद्र में यह सब देखने के लिए मिल रहा है जबकि बीएसपी के लोग घटना वाले दिन से ही पीड़ितों को न्याय दिलाने हेतु प्रशासन पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं. अतः बीजेपी सरकार पीड़ितों को न्याय दे, यह बीएसपी की फिर से मांग है.' उन्होंने कहा, 'जैसा कि सर्वविदित है कि देश में आए दिन आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचार के लिए केन्द्र में रही कांग्रेस व अब बीजेपी की सरकार बराबर की जिम्मेदार है. कांग्रेस के राज में आदिवासियों को जंगलों से बेदखल किया गया जिससे दुखी होकर कुछ लोग नक्सली तक बन गए. अब यूपी में बीजेपी के राज में भी सोनभद्र जिले में कोल/आदिवासी समाज को जमीन से बेदखल करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया है. लेकिन यहां खास ध्यान देने की बात यह है कि इन दोनों में से जो पार्टी सत्ता से बाहर रहती है वह इनका शोषण होने पर अपने घड़ियाली आंसू बहाती है.'
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