हरियाणा विधानसभा चुनाव: कांग्रेस, INLD के साथ बने रहेंगे जाट?- Loktantra Ki Buniyad

हरियाणा:  हरियाणा विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाबी जाट बेल्ट के पास है, जिनकी संख्या चार संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की 36 विधानसभा सीटों पर अच्छी-खासी है। हालांकि, सबसे अहम सवाल है कि जाट वोट किस तरफ जाएगा। क्या वे कांग्रेस, INLD और नवगठित JJP के वफादार बने रहेंगे या बीजेपी की तरफ जाएंगे, जो 2014 में नए सोशल इंजीनियरिंग प्रयोग से गैर-जाट समर्थकों की मदद से सत्ता में आई थी। इकनॉमिक टाइम्स ने इस अहम क्षेत्र का दौरा किया और जमीनी हकीकत की थाह लेने की कोशिश की है। हरियाणा में देवीलाल, बंसीलाल, भजनलाल और हुड्डा परिवारों ने रोहतक से लेकर हिसार होते हुए सिरसा तक फैले जाट बेल्ट पर राज किया है। यहां तक कि देवीलाल की INLD का बंटवारा हो गया है, लेकिन फिर भी कोर जाट वोट INLD या JJP के साथ बना हुआ है। राजनीतिक परिवारों के दबदबे वाले इन क्षेत्रों में जाट वोट बीजेपी की ओर नहीं शिफ्ट होता है। सिरसा जिले के बारापुरा गांव में INLD के प्रति समर्थन का सबूत मिलता है। यहां के सुरेंदर सिंह बताते हैं, ‘हमारे गांव का वोट हमेशा INLD को ही जाता है। अगर हमें कोई नौकरी मिली है, तो वह ओम प्रकाश चौटाला जी के वक्त में मिली है। बीजेपी ने हमारे लिए कुछ नहीं किया है।’ यहां कुछ ही किलोमीटर दूर छतरियां गांव में प्रोमिला महिला चौटाला परिवार के प्रति निष्ठा जाहिर करती हैं। वह कहती हैं, ‘हमारे गांव में जाट आबादी सबसे ज्यादा है। हमने हमेशा चौटाला जी को वोट दिया है। अगर JJP ही खड़ी होती है, तो हमारा वोट उसी को जाएगा।’ आदमपुर निर्वाचन क्षेत्र में किरदार बदलते हैं, लेकिन कहानी वही रहती है। यहां लोग कांग्रेस के कुलदीप विश्नोई के प्रति वफादारी जाहिर करते हैं। बगला गांव के रूपचंद का कहना है, ‘वह किस पार्टी में हैं, इससे हमें कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने हमारे निर्वाचन क्षेत्र के लिए काम किया है। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता है।’ टिकटॉक स्टार सोनाली फोगाट के खिलाफ कुलदीप का दावा काफी मजबूत नजर आता है। यहां लोग विधायक के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप और छापेमारी से नाराजगी भी जाहिर करते हैं। चाय की दुकान चलाने वाले रिशान कहते हैं, ‘हर धंधे में भ्रष्टाचार होता है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोनाली के पास हमारे आदमपुर के लिए खर्च करने भर का वक्त है?’ आदमपुर के घुड़साल गांव के प्रह्लाद सिंह उनके काम गिनाते हैं, ‘कांग्रेस सत्ता में नहीं है, फिर भी कुलदीप ने आदमपुर में सड़क, पानी, सिंचाई और नौकरी जैसे क्षेत्रों में काफी काम किया है।’ बीजेपी के खिलाफ नाराजगी की वजह फरवरी 2016 का जाट आरक्षण आंदोलन बीजेपी के खिलाफ इस नाराजगी की वजह फरवरी 2016 का जाट आरक्षण आंदोलन है। बीजेपी के जाट नेता और हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घरेलू निर्वाचन क्षेत्र नारनौंद में लोगों का गुस्सा साफ झलकता है। सतिंदर सिंह कहते हैं, ‘उन्होंने (अभिमन्यु) कुछ भी नहीं किया है। उन्हें हमारे गांव पेटवाड़ आने दीजिए। उन्हें पता चल जाएगा। यहां असल लड़ाई INLD और JJP के बीच है।’ बीजेपी का राष्ट्रवाद कार्ड नारनौंद टाउन में लोग सत्ता विरोधी लहर की इकलौती वजह रोजगार की कमी को बताते हैं। बीजेपी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ट्रैक रेकॉर्ड और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के दम पर चुनाव लड़ रही है। मोदी और पार्टी के वरिष्ठ नेता राष्ट्रवाद कार्ड खेल रहे हैं। यहां तक कि आर्टिकल 370 को अपनी उपलब्धि गिना रहे हैं, लेकिन यहां इस मुद्दे की गूंज सुनाई नहीं देती है।
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